मंगलवार, 20 जनवरी 2009

श्री गुरु दत्तात्रेय

“ दत्तं भजे गुरु दत्तं भज ||

अत्री अनसूया पुत्र दत्तं भजे”||

“अनंता कोटि ब्रह्मांडा नायका राजाधि रजा योगिराज परब्रह्म श्री दत्तात्रेय ,

श्रीपाद श्रीवल्लाभा वल्लभा श्री न्रूसिहं सरस्वत्ति स्वामी महाराज की जय ।”

गुरुर-ब्रह्म, गुरुर-विष्णुः; गुरु-देवो महेस्वरह;

गुरुर-साक्षाथ परम ब्रह्म; थास्मै श्री गुरवे नमः:

“गुरुर-पिटा, गुरुर-माता, गुरु-देवं, गुरु-गतिः,

सिव-र्य्स्गते गुरु-स्त्राता, गुरु रुष्ट न कस्काना”।

“दात्तात्रेयम-गुरुम-देवं; ध्याये अनिसम-सदा-सिवम

तन्मात्रम – तस्य – गिताम्चा; व्य-कुर्वे-तट-प्रसदेह”

“अवधूता, सदानान्दा, परब्रह्म, स्वरूपिने

विदेह देहा, रूपया दत्तात्रेय नमोस्तुते” ||




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