मंगलवार, 23 सितंबर 2008

शिव गोरक्ष हरे ! जय शिव गोरक्ष हरे

शिव गोरक्ष हरे ! जय शिव गोरक्ष हरे

तुम सत चित आनंद सदाशिव आगम -निगम परे
योग प्रचारण कारण युग युग गोरख रूप धरे............ शिव गोरक्ष हरे ! जय शिव गोरक्ष हरे

अकाल-सकल-,कुल-अकुल,परापर,अलख निरंजन
भावः-भव-विभव-पराभव-कारन ,योगी ध्यान धरे..............शिव गोरक्ष हरे ! जय शिव गोरक्ष हरे

अष्ट सिद्धि नव निधि कर जोर लोटत चरण तले
भुक्ति मुक्ति सुख सम्पति यती पति सब तब एव करे.................... शिव गोरक्ष हरे ! जय शिव गोरक्ष हरे

कुंडल मंडित गंडा स्थल छवि कुंचित केश धरे
सदय नयन स्मरानन युवतन अंग अंग ज्योति जारे............. शिव गोरक्ष हरे ! जय शिव गोरक्ष हरे

अमर काया अवधूत अयोनिज सुर नर नमन करे
तब कृपया पराया परिवेष्टित अधमहू पर तारे............. शिव गोरक्ष हरे ! जय शिव गोरक्ष हरे

कृष्ण रुक्मिणी परिणय प्रकरण देवन विघ्न करे
सुनी रुषी मुनि बिनती तुम प्रकट कंगन बन्ध करे...... शिव गोरक्ष हरे ! जय शिव गोरक्ष हरे

सदगुरु विषम विषय विष मूर्छित तिरिया जल परे
जग मछन्दर गोरख आया गा उधर करे......... शिव गोरक्ष हरे ! जय शिव गोरक्ष हरे

प्रिय वियोग भरतरी विहल विकल मसान फिरे
महा मोहतम दयानिधि सिद्धि समृद्ध करे........... शिव गोरक्ष हरे ! जय शिव गोरक्ष
हरे